कॉस्मेटिक एक्यूपंक्चर क्या है और कैसे इससे सौंदर्य निखारें

कॉस्मेटिक एक्यूपंक्चर क्या है और कैसे इससे सौंदर्य निखारें

आकर्षक, सुंदर, कोमल चेहरा और सुडौल शरीर किसे प्रभावित नहीं करता ? पर सुंदरता के दुश्मन भी कम नहीं होते। युवा होते ही चेहरे पर मुहांसे हमला बोल देते हैं और 30 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते तो आंखों के इर्द-गिर्द नीले-काले घेरे कम उम्र में ही ढलते शरीर की ओर इशारा करने लगते हैं। सुडौल शरीर का सबसे बड़ा दुश्मन है- स्थूलपन। कूल्हे, पेट व जांघों पर चर्बी का अनावश्यक जमांव शरीर को बेढंगा बनाने लगता है। आकर्षक चेहरे के लिए तो मॉइश्चराइजर युक्त विभिन्न प्रकार की क्रीम व लोशन का इस्तेमाल किया जाता है, मोटापा घटाने के लिए भी लोग व्यायाम करते हैं और यहां तक कि डाइटिंग भी करते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया नियमित न रह पाने की वजह से ये सारे प्रयास भी बेकार हो जाते हैं।

अब एक ऐसा आसान तरीका उपलब्ध है, जिससे आप चंद दिनों में ही सुंदर और सुडौल बन सकते हैं, चीनी पद्धति पर आधारित कॉस्मेटिक एक्यूपंक्चर मुहांसों, आंखों के इर्द-गिर्द बने काले घेरों, बदरंग तथा शरीर पर झूलती फालतू चबी को चंद दिनों में दूर करने का जादू का सा असर करता है। और तो और यह मुहांसों के निशान तक बाकी नहीं छोड़ता।

कॉस्मेटिक एक्यूपंक्चर से कितने ही रोगियों के इलाज में जादुई सफलता मिली है। इसकी लोकप्रियता का कारण है बिना किसी दवाई तथा बिना लंबा समय लगाए सुंदरता के दुश्मन रोगों का तुरंत इलाज और खूबी यह है कि इसका कोई दुष्परिणाम भी नहीं होता। मुहांसों के लिए एक्यूपंक्चर द्वारा तैलीय ग्रंथि पर चिकित्सा की जाती है। प्रत्येक मुहांसे में सुई भेदकर त्वचा का फालतू रस सुखा दिया जाता है। जो लोग सुई से डरते हैं, उनके लिए लेजर प्रणाली से चिकित्सा की जाती है। चेहरे के दाग-धब्बे, आंखों के नीले घेरे आठदस मीटिंग में समाप्त हो जाते हैं।

आंखों के इर्द-गिर्द काले धब्बे का कारण अनिद्रा, तनाव, अपच, नशाखोरी, असंतुलित आहार आदि हैं। चेहरे की त्वचा में रंग की गुच्छियां कहीं ज्यादा जमाव कर लेती हैं और कहीं रंग फीका रह जाता है। कॉस्मेटिक एक्यूपंक्चर या लेज़र प्रणाली से रंग की गुच्छियां इधर-उधर फैला दी जाती हैं। रंग-बदरंग नहीं रह जाता और चेहरा सामान्य हो जाता है। कुछ ही दिनों में चेहरा बिना दवाई तथा ऊपरी लेप किए ही सुंदर तथा आकर्षक दिखाई देने लगता है। चेहरे पर असमय आई झुर्रियाँ भी समाप्त हो जाती हैं। इसी तरह मोटापा यानी चर्बी का जमाव भी एक मुसीबत है। एक्यूपंक्चर द्वारा एक महीने में चार किलो वजन घटाया जा सकता है। इसकी सुइयां मृत त्वचा में जान डाल देती हैं।

मांसपेशियां काम करने लगती हैं। सुइयों द्वारा शरीर की विभिन्न नाड़ियों को उत्तेजित करके तथा जरूरत पड़ने पर शांत कर इलाज किया जाता है। प्रत्येक रोग में अलग-अलग बिन्दुओं पर इलाज किया जाता है। एक्यूपंक्चर की गहराई और बिन्दुओं का निर्धारण रोग तथा मांसपेशियों पर निर्भर करता है। स्थूलपन में एक्यूपंक्चर शरीर में नाड़ियों की गर्मी को शांत करने तथा विशेष बिंदुओं को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है। मोटापे के रोगी को भूख अधिक लगती है, तो कान में विशेष बिन्दु पर पतला चांदी का छल्ला डाल देने से भूख पर नियंत्रण हो जाता है।

एक्यूपंक्चर पद्धति चंद दिनों में बिना नुकसान के चबी को सोख लेती है, जिससे कूल्हे, पेट कमर और जांघ की फालतू चबी को बिना ऑपरेशन के ही हटाना संभव है। शरीर की स्थूलता को कम करने के लिए एक्यूपंक्चर के साथ-साथ कुछ नये उपकरणों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। वैक्यूम द्वारा संक्शन करने वाले यंत्र का पेट, कूल्हे, जांघ आदि अधिक चबी वाले स्थानों पर इस्तेमाल किया जाता है। इससे दो तरह के काम होते हैं, एक सामान्य वजन को घटाना और दूसरा शरीर के चबी वाले हिस्से से चबी कम करना।
इस मशीन का इस्तेमाल करने के बाद एक इलेक्ट्रॉनिक मसल स्टीमुलेटर लगाया जाता है, जो शरीर की मांसपेशियों में कसाव पैदा करता है। सुइयों के नाम से डरना नहीं चाहिए। ये सुइयां स्टील से बनी बाल जितनी पतली होती हैं, जिन्हें पेन जैसे आकार वाले प्रेशर यंत्र से इतनी सहजता से लगाते हैं कि स्पर्श तक का पता नहीं लगता। चेहरे के काले धब्बे तथा मुहांसों आदि में लेज़र प्रणाली विशेष कारगर है। लेजर यंत्र दो प्रकार के होते हैं-एक हीलियम नियोन व दूसरा इनफ्रारेड।

हीलियम नियोन लेज़र को कॉस्मेटिक इस्तेमाल में लाया जाता है। इसे चंद सेकंड तक रोगी की त्वचा पर लगाया जाता है। इसके इस्तेमाल में पता ही नहीं चलता कि क्या किया जा रहा है। इससे मुहांसे, झुर्रियां, एड़ियों का जा सकती हैं। एक्यूपंक्चर द्वारा गंजेपन का भी इलाज संभव है। रोगग्रस्त स्थान पर उन बिंदुओं को उत्तेजित कर कार्यशील बना दिया जाता है, जिससे बाल पुनः उग जाते हैं। एक तरफ जहां एक्यूपंक्चर स्थूलपन घटाता है, वहीं इनका दूसरा पक्ष मांसपेशियों के निर्माण में भी कारगर हैं। किन्हीं कारणवश कई स्त्रियों में स्तन विकसित नहीं हो पाते, एक्यूपंक्चर उनके स्तन विकास में भी कारगर है। इससे मांसपेशियों का निर्माण भी होता है।

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